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शराब कर बना राज्य के राजस्व का सबसे बड़ा इंजन, ईंधन कर को भी छोड़ा पीछे

प्रदेश के कर राजस्व के वर्ष 2024-25 के आंकड़ों ने चौंकाने वाली तस्वीर सामने रखी है। इस वित्तीय वर्ष में राज्य के खजाने में सबसे तेज बढ़ोतरी शराब से मिलने वाले कर में दर्ज की गई है। आबकारी राजस्व ने पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस और विमान ईंधन जैसे पारंपरिक रूप से मजबूत राजस्व स्रोतों को भी पीछे छोड़ दिया है।

राज्य कर विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 (अस्थायी) में शराब से वैट संग्रह में रिकॉर्ड 62.32 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2023-24 में जहां शराब से वैट संग्रह 14.70 करोड़ रुपये था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 23.86 करोड़ रुपये पहुंच गया। महज एक साल में इतनी बड़ी छलांग ने राजस्व संरचना में आबकारी क्षेत्र की भूमिका को और मजबूत कर दिया है।

इसके मुकाबले ईंधन क्षेत्र की वृद्धि काफी धीमी रही। पेट्रोल से मिलने वाला राजस्व 9275.31 करोड़ रुपये से बढ़कर 10108.09 करोड़ रुपये हुआ, जिसकी वृद्धि दर 8.98 प्रतिशत रही। हाईस्पीड डीजल से कर संग्रह 16927.65 करोड़ रुपये से बढ़कर 17093.26 करोड़ रुपये पहुंचा, लेकिन इसमें वृद्धि महज 0.98 प्रतिशत रही। प्राकृतिक गैस से मिलने वाले कर में भी मामूली बढ़त दर्ज की गई और यह 4765.72 करोड़ रुपये से बढ़कर 4826.95 करोड़ रुपये हुआ, जो सिर्फ 1.28 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

विमान टर्बाइन ईंधन (एटीएफ) से कर संग्रह 21.61 करोड़ रुपये से बढ़कर 24.86 करोड़ रुपये हो गया, जिसमें 15.03 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि ईंधन श्रेणियों में यह सबसे तेज बढ़त रही, फिर भी शराब से मिलने वाले कर की वृद्धि दर के सामने यह भी काफी पीछे रह गई। यदि पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस और एटीएफ सभी को एक साथ देखा जाए, तब भी शराब कर की वृद्धि सबसे ज्यादा रही।

आबकारी विभाग का बढ़ता दबदबा

इस तरह राज्य की अर्थव्यवस्था में आबकारी कर एक मजबूत चालक के रूप में उभरा है। कुल वैट संग्रह की बात करें तो वर्ष 2024-25 में वैट वस्तु संग्रह 32077.02 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.46 प्रतिशत अधिक है। वहीं शुद्ध वैट संग्रह 32096.54 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 3.16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कुल मिलाकर वृद्धि सीमित रही,लेकिन इसमें सबसे बड़ा योगदान शराब क्षेत्र का रहा।

आबकारी विभाग की भूमिका भी इस दौरान और मजबूत हुई है। वर्ष 2024-25 में कर और करेतर राजस्व के रूप में आबकारी विभाग ने 52574.52 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जो कुल राजस्व का 23.29 प्रतिशत है। वहीं राज्य कर विभाग ने 114637.54 करोड़ रुपये के साथ 50.79 प्रतिशत की हिस्सेदारी दर्ज की। इस तरह कुल राजस्व ढांचे में जीएसटी के बाद आबकारी विभाग दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनकर उभरा है।

राजस्व विशेषज्ञों का मानना है कि शराब के उपभोग में बढ़ोतरी, नीति में बदलाव और वसूली व्यवस्था के बेहतर होने से आबकारी कर में यह उछाल देखने को मिला है। साफ है कि कर वृद्धि की दौड़ में शराब ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन जैसे मजबूत और पारंपरिक स्रोतों को पीछे छोड़ते हुए नया रिकॉर्ड कायम किया है।

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