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JEE Advanced का पैटर्न बदलने की तैयारी, एडैप्टिव टेस्टिंग पर विचार; पहले होगा ऑप्शनल मॉक टेस्ट

नई दिल्ली।
आईआईटी में दाखिले के लिए होने वाली JEE Advanced परीक्षा का पैटर्न आने वाले समय में बदल सकता है। आईआईटी काउंसिल ने JEE Advanced को ‘एडैप्टिव टेस्टिंग’ पैटर्न पर आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है। आईआईटी काउंसिल, देश के सभी 23 आईआईटी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को शामिल करने वाली सर्वोच्च गवर्निंग बॉडी है।

प्रस्ताव के मुताबिक, JEE Advanced को एक आधुनिक और टेक्नोलॉजी आधारित एडैप्टिव टेस्टिंग सिस्टम पर लाया जा सकता है। इस सिस्टम में छात्रों को उनकी क्षमता के अनुसार सवाल मिलेंगे। जैसे-जैसे छात्र सवाल हल करता जाएगा, अगला प्रश्न आसान या कठिन होता जाएगा।

क्या है एडैप्टिव टेस्टिंग सिस्टम
एडैप्टिव टेस्टिंग एक ऐसा एग्जामिनेशन सिस्टम है, जिसमें कंप्यूटर छात्र के हर उत्तर के आधार पर अगला सवाल तय करता है। इसमें छात्रों का मूल्यांकन दो आधारों पर होता है—

  • एक्युरेसी: छात्र कितने सही उत्तर दे रहा है।
  • एबिलिटी: वह किस स्तर तक कठिन सवाल हल कर सकता है।

इससे केवल रटने की क्षमता नहीं, बल्कि लॉजिकल थिंकिंग, इंटेलिजेंस और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल का सही आकलन हो पाता है।

JEE Advanced में एडैप्टिव टेस्टिंग लाने के 5 उद्देश्य

  • छात्रों पर परीक्षा का मानसिक दबाव कम करना।
  • रटने की बजाय समझ आधारित चयन सुनिश्चित करना।
  • क्रिटिकल थिंकिंग और लॉजिकल रीजनिंग को प्राथमिकता देना।
  • कोचिंग-आधारित तैयारी के प्रभाव को सीमित करना।
  • पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं पर नियंत्रण।

एक्सपर्ट्स की राय: स्ट्रेस और कोचिंग पूरी तरह खत्म नहीं होगी
शिक्षाविदों का मानना है कि छात्रों का तनाव केवल परीक्षा पैटर्न से नहीं जुड़ा होता। हाई कॉम्पिटिशन, सीमित सीटें और सामाजिक अपेक्षाएं तनाव का बड़ा कारण होती हैं। ऐसे में सिर्फ पैटर्न बदलने से तनाव अपने आप कम हो जाएगा, यह कहना व्यावहारिक नहीं है।

इसी तरह, कोचिंग पर निर्भरता कम होने के दावे को भी विशेषज्ञ पूरी तरह स्वीकार नहीं करते। GRE, GMAT, TOEFL और IELTS जैसे इंटरनेशनल एडैप्टिव एग्जाम्स के लिए भी बड़ी संख्या में छात्र कोचिंग लेते हैं। हालांकि, एडैप्टिव सिस्टम से कोचिंग का फोकस रटने से हटकर रणनीति, लॉजिक और टाइम मैनेजमेंट पर शिफ्ट हो सकता है।

मौजूदा पैटर्न से कैसे अलग होगा नया सिस्टम
फिलहाल JEE Advanced का पेपर 3 घंटे का होता है, जिसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के सवाल होते हैं। छात्र खुद तय करता है कि किस सेक्शन को कितना समय देना है।

अगर एडैप्टिव टेस्टिंग लागू होती है, तो कंप्यूटर हर उत्तर के आधार पर अगला सवाल तय करेगा। इससे परीक्षा ज्यादा कंट्रोल्ड और स्ट्रक्चर्ड हो जाएगी और मौजूदा पैटर्न से पूरी तरह अलग अनुभव होगा।

पहले होगा ऑप्शनल एडैप्टिव मॉक टेस्ट
आईआईटी काउंसिल ने सुझाव दिया है कि बिना डेटा के सीधे पैटर्न बदलना सही नहीं होगा। इसलिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर JEE Advanced से पहले एक ऑप्शनल एडैप्टिव मॉक टेस्ट आयोजित किया जाएगा।

  • यह मॉक टेस्ट पूरी तरह वैकल्पिक होगा।
  • इसका उद्देश्य चयन नहीं, बल्कि छात्रों और सिस्टम का मूल्यांकन करना होगा।
  • यह परीक्षा JEE Advanced से करीब दो महीने पहले कराई जाएगी।

इस मॉक टेस्ट से छात्रों के प्रदर्शन का विश्लेषण किया जाएगा और यह तय किया जाएगा कि भविष्य में JEE Advanced का पैटर्न बदलना व्यावहारिक और प्रभावी होगा या नहीं।

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