सरगुजा में फर्जी लोन का मामला, 2 हजार से अधिक किसान कर्जदार, कलेक्ट्रेट पहुंचे पीड़ित
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में केरजू सहकारी समिति से जुड़े किसानों के नाम पर फर्जी लोन निकाले जाने का गंभीर मामला सामने आया है। किसानों का आरोप है कि उन्होंने जितना कर्ज लिया ही नहीं, उससे कहीं अधिक रकम उनके खातों में लोन के रूप में दर्ज कर दी गई। समर्थन मूल्य पर धान बेचने के बाद जब किसान भुगतान लेने पहुंचे, तो उनकी राशि लोन के समायोजन में काट ली गई।
सोमवार को इस मामले को लेकर करीब 200 से अधिक किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन से शिकायत की। किसानों के साथ पूर्व मंत्री अमरजीत भगत भी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और पूरे मामले की जांच की मांग की।
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि यह घोटाला करोड़ों रुपये का है और करीब दो हजार से अधिक किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से लोन निकाला गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि साल भर की मेहनत के बाद धान बेचने पर भी किसानों को उनकी मेहनत का पैसा नहीं मिल पा रहा है।
सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने किसानों को आश्वासन दिया कि मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
पांच गांवों के किसानों के नाम पर निकला फर्जी लोन
सीतापुर ब्लॉक की केरजू सहकारी समिति के अंतर्गत केरजू, कुनमेरा, ढोढ़ागांव, बंशीपुर और हरदीडांड गांव आते हैं। किसानों को फर्जी लोन की जानकारी तब हुई, जब वे धान बेचने के बाद भुगतान लेने सहकारी बैंक पेटला पहुंचे। बैंक में उन्हें बताया गया कि उनके नाम पर लाखों रुपये का कर्ज है और धान बिक्री की पूरी राशि लोन में एडजस्ट कर दी गई है।
किसानों के अनुसार, इन पांच गांवों के दो हजार से अधिक किसान समिति में पंजीकृत हैं और लगभग सभी के नाम पर फर्जी लोन दर्ज है। किसानों ने सहकारी बैंक से केरजू समिति के ऋण लेने वाले किसानों की सूची भी मांगी, लेकिन बैंक की ओर से कोई सूची उपलब्ध नहीं कराई गई।
समिति प्रबंधक की आत्महत्या से जुड़ा मामला
इस मामले से जुड़ा एक और गंभीर पहलू सामने आया है। केरजू सहकारी समिति के प्रबंधक दिनेश गुप्ता ने 25 दिसंबर की रात अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। बताया जा रहा है कि उसी रात लोन राशि के समायोजन को लेकर किसानों से उनका विवाद भी हुआ था।
माना जा रहा है कि दिनेश गुप्ता को करोड़ों रुपये के फर्जी लोन की जानकारी थी और इसी दबाव के चलते उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। अब यह मामला प्रशासन और जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।