सरगुजा में कड़ाके की ठंड और घना कोहरा, विजिबिलिटी 10 मीटर से कम; अंबिकापुर में ठंड से दूसरी मौत
उत्तर से आ रही सर्द हवाओं के चलते छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। सरगुजा जिले में मंगलवार सुबह घना कोहरा छाया रहा, जिससे विजिबिलिटी 10 मीटर से भी कम दर्ज की गई। हालात ऐसे रहे कि वाहन चालकों को दिन में भी लाइट जलाकर वाहन चलाने पड़े। जिले में रात का न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अगले तीन दिनों के भीतर न्यूनतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट हो सकती है। इससे रात और सुबह के समय ठंड का असर और बढ़ेगा। सरगुजा, रायपुर और बिलासपुर संभाग के एक-दो जिलों में घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने सुबह और रात के समय विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। हालांकि, अगले 24 घंटे में मौसम में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं जताई गई है।
पिछले 24 घंटे में प्रदेश का अधिकतम तापमान 30.9 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 7.6 डिग्री सेल्सियस पेंड्रा रोड में रहा। पेंड्रा-अमरकंटक क्षेत्र शीतलहर की चपेट में है।
अंबिकापुर में ठंड से दूसरी मौत
अंबिकापुर से लगे श्रीगढ़ इलाके में नए साल की रात एक बुजुर्ग की ठंड से मौत हो गई। बुजुर्ग का शव पैरावट में अकड़ा हुआ मिला। बताया जा रहा है कि कम कपड़ों में खुले में सोने के कारण वे हाइपोथर्मिया की चपेट में आ गए। अंबिकापुर में ठंड से मौत का यह दूसरा मामला है। इससे पहले 11 दिसंबर की रात अंबिकापुर बस स्टैंड में खुले में सो रहे एक व्यक्ति की भी ठंड से मौत हो चुकी है।
बच्चों की सेहत पर ठंड का असर
कड़ाके की ठंड का असर बच्चों की सेहत पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बीते एक महीने में रायपुर के अंबेडकर अस्पताल समेत निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में जल्दी ठंडा होता है। नवजात शिशुओं की मांसपेशियां पूरी तरह विकसित नहीं होतीं, जिससे वे ठंड सहन नहीं कर पाते। वहीं, सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में हाइपोथर्मिया का खतरा अधिक रहता है।
डॉक्टरों के मुताबिक, लापरवाही बरतने पर कई मामलों में बच्चों को एनआईसीयू (NICU) और एसएनसीयू (SNCU) में भर्ती कर इलाज करना पड़ रहा है। नवजात के शरीर का तापमान अचानक कम हो जाना हाइपोथर्मिया का प्रमुख लक्षण है।
अस्पतालों की ओपीडी में बढ़ी भीड़
ठंड बढ़ने के साथ ही अस्पतालों की ओपीडी में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। अंबेडकर अस्पताल में मेडिसिन, पीडियाट्रिक और चेस्ट विभाग में 600 से ज्यादा मरीज सामने आए हैं। वहीं, रोजाना 2000 से अधिक मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।