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धान छोड़ खीरे की खेती अपनाई, केसीजी जिले के किसान की आमदनी कई गुना बढ़ी

खैरागढ़–छुईखदान–गंडई (केसीजी) जिले के ग्राम गातापार खुर्द में 40 साल तक परंपरागत धान की खेती करने के बाद एक किसान ने खेती का तरीका बदला और आमदनी कई गुना बढ़ा ली। 12वीं तक पढ़े 55 वर्षीय किसान सुरेश सिन्हा ने धान की जगह 6 एकड़ में खीरे की खेती शुरू की, जिससे महज तीन महीने में उन्हें धान की तुलना में कई गुना मुनाफा मिला।

सुरेश सिन्हा ने खीरे की खेती में आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। उन्होंने पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया। वर्तमान में उनके खेत में उगा खीरा 20 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है। वे लगातार नई तकनीक अपनाकर उत्पादन और मुनाफा बढ़ा रहे हैं।

राजस्थान से सीखी इजरायली तकनीक

नई फसल और तकनीक को समझने के लिए सुरेश सिन्हा राजस्थान पहुंचे। वहां गुड़ा कुमावतान में खीरे की खेती कर रहे किसान खेमाराम चौधरी से उन्होंने इजरायली तकनीक सीखी और उसे अपने खेत में अपनाया। इस तकनीक से उन्हें जानकारी मिली कि खीरे की खेती में पानी, मेहनत, लागत, बीमारी और कीट प्रकोप कम होता है, जबकि मुनाफा ज्यादा मिलता है।

खेती शुरू करने से पहले उन्होंने मिट्टी परीक्षण कराया। कृषि वैज्ञानिकों की मदद से मिट्टी को खीरे की खेती के अनुकूल बनाया गया और आवश्यक खाद व दवाओं का प्रयोग कर हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म किया गया। क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी खीरे की पैदावार के लिए अनुकूल साबित हुई। पॉलीहाउस में बीज लगाने के 32 दिन के भीतर ही आमदनी शुरू हो जाती है।

प्रति एकड़ 30–40 टन तक उत्पादन

सुरेश सिन्हा बताते हैं कि इजरायली तकनीक के तहत पॉलीहाउस या नेट हाउस में नियंत्रित वातावरण, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग का उपयोग किया जाता है। खीरे की बेलों को बांस या तार के सहारे ऊपर चढ़ाया जाता है, जिससे प्रति एकड़ 30 से 40 टन तक उत्पादन संभव होता है। यह फसल सालभर उगाई जा सकती है।

उनके अनुसार, प्रति एकड़ खीरे की खेती से करीब 1 लाख रुपए तक की आमदनी होती है, जबकि लागत महज 30 हजार रुपए के आसपास रहती है। अन्य फसलों में यही लागत 50 हजार रुपए से अधिक हो जाती है। खीरा तीन महीने की फसल होने के कारण नुकसान की स्थिति में दोबारा बोनी भी की जा सकती है।

देशभर में खीरे की मांग

सुरेश सिन्हा का कहना है कि खीरे की बाजार में कोई समस्या नहीं है। प्रदेश से लेकर देशभर में इसकी अच्छी मांग है। उनके खेत से खीरे की सप्लाई उत्तर प्रदेश, कोलकाता, ओडिशा, बिहार और झारखंड तक की जा रही है। धान की जगह टमाटर और खीरा लगाने से उन्हें ढाई लाख रुपए का अतिरिक्त मुनाफा हुआ।

साल 2024 में जुलाई से मार्च के बीच 7 एकड़ में टमाटर की बंपर पैदावार से उन्हें 3 लाख रुपए का फायदा हुआ था। इसके अलावा पॉलीहाउस में शिमला मिर्च की खेती से साढ़े तीन लाख रुपए का मुनाफा मिला।

34 लाख का पॉलीहाउस, 15 एकड़ में उन्नत खेती

सुरेश सिन्हा ने 34 लाख रुपए की लागत से पॉलीहाउस तैयार किया है। इस वर्ष वे सिजेंटा कंपनी की ‘मायला’ वैरायटी का टमाटर लगाने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी कुल 15 एकड़ कृषि भूमि है। दवा छिड़काव के लिए उन्होंने स्ट्रिप मशीन भी लगाई है।

खेती में आधुनिक तकनीक अपनाकर सुरेश सिन्हा आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।

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