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AI ने बचाई 57 वर्षीय मजदूर की जान, रूटीन डायबिटीज टेस्ट से पकड़ा गया शुरुआती स्टेज का पैंक्रियाज कैंसर

चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से पैंक्रियाज जैसे घातक कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 57 वर्षीय मजदूर किउ सिजुन डायबिटीज की सामान्य जांच कराकर घर लौटे थे। तीन दिन बाद अस्पताल से डॉक्टर का फोन आया और दोबारा आने को कहा गया। इस कॉल ने सिजुन को घबरा दिया, लेकिन जांच में जो सामने आया, उसने उनकी जान बचा ली।

डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें अग्नाशय (पैंक्रियाज) का कैंसर है, लेकिन यह बेहद शुरुआती स्टेज में पकड़ में आ गया। अस्पताल में AI आधारित सिस्टम की मदद से पुराने मेडिकल डेटा और टेस्ट पैटर्न का विश्लेषण किया गया था, जिससे बीमारी का समय रहते पता चल गया। इसके बाद तुरंत ऑपरेशन कर ट्यूमर निकाल दिया गया।

पैंक्रियाज कैंसर को दुनिया के सबसे घातक कैंसरों में गिना जाता है। आमतौर पर इसके लक्षण तब सामने आते हैं, जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। यही वजह है कि केवल करीब 10 प्रतिशत मरीज ही पांच साल तक जीवित रह पाते हैं। एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स की मौत भी इसी बीमारी से हुई थी।

डायबिटीज टेस्ट से कैंसर की पहचान, माना जा रहा चमत्कार

इस मामले की खास बात यह रही कि मरीज डायबिटीज की जांच कराने गया था और कैंसर का कोई संदेह नहीं था। AI सिस्टम ने पुराने टेस्ट डेटा में असामान्य पैटर्न पकड़ा और डॉक्टरों को अलर्ट किया। कैंसर शुरुआती स्टेज में मिलने की वजह से ऑपरेशन संभव हो सका।

किउ सिजुन अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और अपने खेत में सब्जियां उगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें AI की ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन समय पर मिली चेतावनी ने उनकी जिंदगी बचा ली।

PANDA AI टूल से हो रही पहचान

यह मामला चीन के निंगबो यूनिवर्सिटी से जुड़े पीपुल्स हॉस्पिटल का है, जहां ‘PANDA’ नामक AI टूल का इस्तेमाल किया जा रहा है। PANDA का पूरा नाम है – Pancreatic Cancer Detection with Artificial Intelligence। यह टूल बिना कॉन्ट्रास्ट CT स्कैन के जरिए भी पैंक्रियाज कैंसर की पहचान करने में सक्षम है।

नवंबर 2024 से चल रहे क्लिनिकल ट्रायल में अब तक 1.80 लाख से ज्यादा पेट और सीने के CT स्कैन का विश्लेषण किया जा चुका है। इसकी मदद से 24 कैंसर के मामले सामने आए, जिनमें 14 शुरुआती स्टेज के थे। इनमें से 20 मामलों में इंट्राडक्टल एडेनोकार्सिनोमा की पहचान हुई, जो पैंक्रियाज कैंसर का सबसे घातक रूप माना जाता है।

93 प्रतिशत तक सटीक पहचान का दावा

डॉक्टरों के अनुसार, AI ने ऐसे कई मामलों में बीमारी पकड़ी, जिन्हें पहले सामान्य माना गया था। 2023 में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक यह सिस्टम 93 प्रतिशत मामलों में सही पहचान करने में सफल रहा है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि AI अनुभवी डॉक्टरों का विकल्प नहीं, बल्कि उनकी मदद करने वाला एक शक्तिशाली उपकरण है।

अलीबाबा के अनुसार, अमेरिका की फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने PANDA को ‘ब्रेकथ्रू डिवाइस’ का दर्जा दिया है। इसका मतलब है कि यह तकनीक बीमारी की पहचान और इलाज में बड़ा बदलाव ला सकती है। फिलहाल इसे जल्द बाजार में लाने के लिए मंजूरी की प्रक्रिया तेज कर दी गई है और चीन में इसके कई क्लिनिकल ट्रायल जारी हैं।

यह मामला दिखाता है कि कैसे AI तकनीक कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की समय रहते पहचान कर हजारों जिंदगियां बचा सकती है।

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