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भारत ने बंगाल की खाड़ी में INS अरिघाट से K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया

नई दिल्ली: भारत ने मंगलवार को बंगाल की खाड़ी में न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन INS अरिघाट से 3,500 किलोमीटर रेंज वाली K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। लॉन्च विशाखापट्टनम तट के पास किया गया। यह परीक्षण भारत की समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोध क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

K-4 मिसाइल की खासियत
K-4 मिसाइल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे सबमरीन से लॉन्च कर दूर स्थित टारगेट्स पर हमला किया जा सके। यह 2 टन तक न्यूक्लियर वारहेड ले जाने में सक्षम है। मिसाइल का नाम “K” अक्षर के सम्मान में रखा गया है, जो भारत के मिसाइल कार्यक्रम में अहम भूमिका निभाने वाले डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सम्मान में है।

K-4, जमीन से लॉन्च होने वाली अग्नि-सीरीज पर आधारित एडवांस सिस्टम मिसाइल है, जिसे पनडुब्बी से लॉन्च करने के लिए अनुकूल बनाया गया है। लॉन्च के समय यह मिसाइल समुद्र की सतह से बाहर निकलती है और उड़ान भरते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ती है। इसे अरिहंत-क्लास की पनडुब्बियों से दागा जा सकता है।

न्यूक्लियर ट्रायड का अहम हिस्सा
K-4 मिसाइल भारत की न्यूक्लियर ट्रायड का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह भारत की डिटेरेंस क्षमता को मजबूत करती है, यानी किसी संभावित दुश्मन को यह संदेश देती है कि किसी भी हमले का जवाब दिया जा सकता है। अब भारत के पास जमीन, हवा और समुद्र—तीनों माध्यमों से परमाणु हथियार लॉन्च करने की क्षमता है।

हाल ही में आकाश-NG का सफल परीक्षण
भारतीय सेना ने 23 दिसंबर को आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम के एडवांस्ड वर्जन, आकाश नेक्स्ट जेनरेशन (आकाश-NG) का सफल ट्रायल ओडिशा के चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में किया। DRDO के मुताबिक, ट्रायल के दौरान आकाश-NG ने अलग-अलग दूरी और ऊंचाई पर मौजूद हवाई लक्ष्यों को सटीक तरीके से नष्ट किया। इसमें सीमा के पास कम ऊंचाई पर उड़ने वाले और लंबी दूरी पर ज्यादा ऊंचाई वाले लक्ष्य शामिल थे।

इस परीक्षणों के साथ भारत की मिसाइल क्षमताओं में लगातार मजबूती आई है और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा मिला है।

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