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छत्तीसगढ़ में क्रिसमस पर चर्चों की अनसुनी कहानियां: विश्रामपुर में बना पहला मिशनरी चर्च और 100% क्रिश्चियन गांव

छत्तीसगढ़ में क्रिसमस के मौके पर चर्चों और मसीही समाज में उत्साह चरम पर है। प्रदेश में लगभग 727 चर्च हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में छोटे चर्चों को जोड़कर यह संख्या 900 के पार है।

इतिहास में दर्ज पहला मिशनरी चर्च इम्मानुएल चर्च 18वीं शताब्दी में बलौदाबाजार के विश्रामपुर में स्थापित हुआ। इसे ‘द सिटी ऑफ रेस्ट’ के नाम से जाना जाता है। फादर ऑस्कर थियोडोर लोर ने 15 फरवरी 1873 को इस चर्च का निर्माण शुरू किया और 29 मार्च 1874 को इसे पूरा किया। यह पत्थरों से बना, बिना कॉलम का चर्च है, और इसके साथ जुड़ा कब्रिस्तान इसे विशेष बनाता है।

ऑस्कर लोर जर्मनी में जन्मे थे और मेडिकल की पढ़ाई के बाद भारत आए। उन्होंने 1850 में रांची में हिंदी सीखी, लोगों का इलाज किया और सेवा शुरू की। 1868 में वे परिवार सहित विश्रामपुर आकर मिशनरी कार्यों में जुट गए। उनके प्रयासों से 1880 में चार लोग ईसाई धर्म अपनाने से 1883 तक संख्या 258 हो गई। 1884 तक रायपुर, बैतलपुर और परसाभदर में मिशनरी केंद्र स्थापित किए गए और 11 स्कूल खोले गए।

विश्रामपुर में वर्तमान में सभी लोगों की आबादी ईसाई है। फादर लोर और उनके परिवार ने लोगों को चिकित्सा, शिक्षा, भोजन और रोजगार उपलब्ध कराकर धर्म का प्रसार किया। उनके बेटे जूलियस ने गॉस्पेल ऑफ मार्क्स का छत्तीसगढ़ी अनुवाद कर धर्म की पहुंच बढ़ाई।

विश्रामपुर और इसके आसपास के क्षेत्र अब छत्तीसगढ़ में ईसाई धर्म का केंद्र बन चुके हैं, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में भी चर्च और मिशनरी कार्य सक्रिय हैं। 154 साल पहले शुरू हुई यह मिशनरी शाखाएं आज लाखों लोगों से जुड़ी हैं और प्रदेश के धार्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय का प्रतिनिधित्व करती हैं।

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