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वर्ष 2025 में भारतीय डाक ने डिजिटल, वित्तीय और प्रशासनिक सेवाओं में बढ़ाया दबदबा

नई दिल्ली। वर्ष 2025 भारतीय डाक विभाग के लिए बदलाव और उपलब्धियों से भरा रहा। संचार मंत्रालय के तहत आने वाले इस विभाग ने अपनी भूमिका केवल चिट्ठी-पत्री तक सीमित नहीं रखी, बल्कि डिजिटल, वित्तीय और प्रशासनिक सेवाओं में ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक अपनी पहुंच बढ़ाकर खुद को आम लोगों के लिए एक भरोसेमंद रीढ़ (बैकबोन) के रूप में स्थापित कर लिया।

पासपोर्ट और आधार सेवाओं में मजबूती
आम नागरिकों को सुविधा देने में विभाग की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘डाकघर पासपोर्ट सेवा केंद्रों’ (POPSKs) का विस्तार रही। विदेश मंत्रालय के सहयोग से 30 नवंबर 2025 तक देशभर में 452 POPSKs संचालित किए गए, जिससे पासपोर्ट सेवाएं लगभग हर लोकसभा क्षेत्र तक पहुंच गईं। जनवरी से नवंबर के बीच 29 लाख से अधिक पासपोर्ट-संबंधित आवेदनों को प्रोसेस किया गया, जिससे 114.88 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।

आधार सेवाओं को मजबूत करने में भी विभाग ने अहम भूमिका निभाई। देशभर में 13,000 से अधिक आधार केंद्र डाकघरों से संचालित हुए। ‘राष्ट्रीय डाक सप्ताह’ के दौरान 1,500 से अधिक विशेष शिविर लगाए गए। 2025 में कुल 2.35 करोड़ से अधिक आधार नामांकन और अपडेट किए गए, जिससे 129.13 करोड़ रुपये का राजस्व जुटा।

डोर-स्टेप केवाईसी और वित्तीय समावेशन
वर्ष 2025 में वित्तीय समावेशन पर विशेष जोर दिया गया। डाक विभाग ने म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए लगभग 5 लाख ‘डोर-स्टेप केवाईसी’ सत्यापन पूरे किए। एएमएफआई, यूटीआई और एसबीआई म्यूचुअल फंड जैसी संस्थाओं के साथ हुए समझौतों ने डाकघरों को निवेश वितरण का भरोसेमंद माध्यम बना दिया।

सिम कार्ड और डिजिटल कनेक्टिविटी
दूरसंचार क्षेत्र में विभाग ने बीएसएनएल के साथ समझौते के तहत 1.64 लाख से अधिक डाकघरों में सिम कार्ड बिक्री और रिचार्ज सुविधा उपलब्ध कराई। इससे विशेष रूप से उन क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार हुआ, जहां नेटवर्क की पहुंच कम थी।

तकनीकी नवाचार
भारतीय डाक ने इसरो और आईआईटी हैदराबाद के सहयोग से ‘डिजिपिन’ लॉन्च किया। यह 10-अक्षरों वाली जियो-कोडेड डिजिटल एड्रेस प्रणाली भारत में हर 4×4 मीटर के ग्रिड की विशिष्ट पहचान करती है। इस नवाचार को ‘एशियन-पैसिफिक पोस्टल यूनियन बिजनेस फोरम’ में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।

निर्यात और रोजगार में योगदान
डाकघर निर्यात केंद्रों की संख्या 1,000 से अधिक कर दी गई, जिससे लगभग 287 करोड़ रुपये का निर्यात संभव हुआ। इस पहल से महिला उद्यमियों और एमएसएमई को सीधे लाभ मिला। रोजगार सृजन में योगदान देते हुए विभाग ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 1.69 लाख इकाइयों का भौतिक सत्यापन किया।

सांस्कृतिक और अंतरराष्ट्रीय पहल
‘हर घर तिरंगा’ अभियान 4.0 के तहत 28 लाख से अधिक राष्ट्रीय ध्वज वितरित किए गए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, यूपीआई-यूपीयू इंटरलिंकेज की सफल लॉन्चिंग और रूस के साथ ‘इंटरनेशनल ट्रैक्ड पैकेट सर्विस’ समझौते ने भारत की ‘पोस्टल डिप्लोमेसी’ को नई मजबूती दी।

संचार मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2025 में भारतीय डाक ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अपनी सेवाओं की पहुंच बढ़ाकर डिजिटल, वित्तीय और प्रशासनिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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