दो साल तक भरण-पोषण न देने पर पत्नी को तलाक का अधिकार, हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार रखा
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुस्लिम कानून के तहत एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि पति लगातार दो वर्ष तक पत्नी को भरण-पोषण नहीं देता है, तो पत्नी को तलाक लेने का कानूनी अधिकार है। हाईकोर्ट ने इस मामले में फैमिली कोर्ट द्वारा पारित तलाक की डिक्री को सही ठहराते हुए पति की याचिका खारिज कर दी।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, पति की ओर से लंबे समय तक भरण-पोषण न देना पत्नी के लिए तलाक का वैध आधार है। कोर्ट ने माना कि पत्नी को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार है और भरण-पोषण न देना वैवाहिक कर्तव्यों का गंभीर उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि फैमिली कोर्ट ने साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर सही निष्कर्ष निकाला है। ऐसे में उसमें हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं बनता। कोर्ट के इस फैसले को मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की दिशा में अहम माना जा रहा है।