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रुपए की गिरावट पर बोलीं वित्त मंत्री सीतारमण—”घबराने की जरूरत नहीं, रुपया खुद अपनी राह बनाएगा”

भारतीय रुपया इन दिनों डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के आसपास बना हुआ है, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि इसे लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। एक निजी कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि “रुपया अपनी राह खुद-ब-खुद बना लेगा” और इसके उतार-चढ़ाव को पुराने अनुभवों से जोड़कर देखने के बजाय मौजूदा आर्थिक स्थितियों के आधार पर समझना चाहिए।

4 दिसंबर को रुपया डॉलर के मुकाबले ₹90.46 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया था। विशेषज्ञ इसके पीछे भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली को मुख्य कारण बता रहे हैं। यह स्थिति तब सामने आई है जब देश में खुदरा महंगाई रिकॉर्ड लो पर है और GDP ग्रोथ 8% से ऊपर बनी हुई है।

वित्त मंत्री ने कहा कि रुपये की कमजोरी को केवल निर्यातकों के लाभ के रूप में देखना सही नहीं है, खासकर तब जब अमेरिका कई आयातित वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ा रहा है। उनका कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है और विकास दर का प्रभावी विश्लेषण इसी संदर्भ में होना चाहिए।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, Q2FY26 में GDP ग्रोथ 8.2% पर पहुंच गई है, जो छह तिमाही में सर्वाधिक है। वहीं, अक्टूबर में खुदरा महंगाई 0.25% तक गिर गई, जो ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर है। सीतारमण ने भरोसा जताया कि चालू वित्त वर्ष में विकास दर 7% या उससे अधिक रहने की संभावना है।

टैक्स और जीएसटी सुधारों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आयकर संरचना में किए गए बदलावों का लाभ अगले साल टैक्स कलेक्शन में दिखाई देगा, जबकि उपभोक्ता खर्च में तेजी अभी से दिख रही है। जीएसटी सरलीकरण के प्रभाव मध्यम अवधि में और स्पष्ट होंगे।

सरकार का मानना है कि मजबूत आर्थिक बुनियाद और निरंतर सुधारों के कारण आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था स्थिर गति से आगे बढ़ती रहेगी।

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