राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शादी की उम्र न होने पर भी लिव-इन रिलेशन में रह सकते हैं कपल, पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश
नई दिल्ली। राजस्थान हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि किसी लड़का और लड़की की अभी शादी की उम्र नहीं हुई है, फिर भी वह चाहें तो आपसी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रह सकते हैं। यह फैसला कोटा के एक 18 वर्षीय युवती और 19 वर्षीय युवक की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। सुनवाई जस्टिस अनूप ढांड की बेंच ने की।
सरकारी वकील ने अदालत में यह दलील दी कि लड़का 21 वर्ष से कम और लड़की 18 वर्ष से कम है, इसलिए उन्हें लिव-इन में रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है। केवल विवाह के योग्य न होने के आधार पर किसी को अपने मौलिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप न तो अवैध है और न ही भारतीय कानून में अपराध।
मामले के अनुसार, यह कपल 27 अक्टूबर 2025 से आपसी सहमति से लिव-इन रिलेशन में रह रहा है, लेकिन लड़की के परिवार वाले इसका विरोध कर रहे हैं और कपल को जान से मारने की धमकी दे चुके हैं। इस खतरे को देखते हुए कपल ने पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। कपल का कहना है कि कोटा पुलिस को लिखित शिकायत देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अदालत ने भीलवाड़ा और जोधपुर पुलिस को कपल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।