Education News, Madhya Pradesh, News, State News

अब कॉलेजों से ‘गायब’ नहीं हो सकेंगे मध्य प्रदेश के प्रोफेसर, अटेंडेंस को लेकर शिक्षा विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश

अब कॉलेजों से ‘गायब’ नहीं हो सकेंगे MP के प्रोफेसर, अटेंडेंस पर शिक्षा विभाग के सख्त निर्देश

मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों में शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। अब सरकारी और अनुदान प्राप्त अशासकीय कॉलेजों में केवल उपस्थिति दर्ज कर कॉलेज छोड़ देने वाले प्रोफेसरों पर कड़ी कार्रवाई होगी। विभाग ने सभी कॉलेज प्राचार्यों और DDO (ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) को निर्देश जारी किए हैं कि उपस्थिति और कार्य समय के नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए।

शिकायतों के बाद आई सख्ती

उच्च शिक्षा विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई शिक्षक महज उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर कॉलेज से चले जाते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए हाल ही में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया कि सभी शिक्षकों का वेतन अब ‘सार्थक ऐप’ पर दर्ज उपस्थिति के आधार पर ही मिलेगा।

हर दिन 6 घंटे कॉलेज में रहना अनिवार्य

नई गाइडलाइन के अनुसार, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, लाइब्रेरियन, क्रीड़ा अधिकारी, अतिथि शिक्षक, जनभागीदारी स्टाफ और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए हर कार्यदिवस में कम से कम 6 घंटे कॉलेज में उपस्थित रहना जरूरी होगा। नियम का उल्लंघन करने पर वेतन कटौती की जाएगी।

उपस्थिति अब केवल ‘सार्थक ऐप’ से मान्य

अब कॉलेज स्टाफ की उपस्थिति केवल सार्थक ऐप के माध्यम से ही मान्य मानी जाएगी। मार्च 2025 से वेतन भुगतान इसी ऐप की उपस्थिति के आधार पर किया जाएगा। सभी प्राचार्य और DDO को निर्देश दिए गए हैं कि हर महीने की 30 तारीख तक वेतन प्रस्ताव में 6 घंटे की उपस्थिति की पुष्टि जोड़ें।

छुट्टियों का ऑनलाइन प्रबंधन

विभाग eHRMS (इलेक्ट्रॉनिक ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम) के अंतर्गत एक नया लीव मैनेजमेंट सिस्टम भी विकसित कर रहा है। अनुपस्थित होने पर प्राचार्य ही उस अवकाश की स्वीकृति करेंगे, जो आगे eHRMS पोर्टल पर दर्ज होगा और वेतन का आधार बनेगा।

प्राचार्य और DDO होंगे जिम्मेदार

यदि किसी कॉलेज में नियमों का पालन नहीं हुआ, तो विभाग सीधे प्राचार्य और DDO को जिम्मेदार ठहराएगा। इन निर्देशों को तुरंत और सख्ती से लागू करने के लिए कहा गया है।

यह कदम राज्य के उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अहम माना जा रहा है, जिससे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में भी सुधार की उम्मीद है।

क्या आप चाहेंगे कि मैं इस पर एक प्रेस रिलीज़ या सोशल मीडिया पोस्ट भी तैयार करूं?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *