राजनांदगांव से संचालित हो रहा था धर्मांतरण का नेटवर्क, अवैध चर्च-आश्रम पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से एक संगठित धर्मांतरण नेटवर्क के संचालन का खुलासा हुआ है। लालबाग थाना क्षेत्र के ग्राम धर्मापुर में अवैध रूप से संचालित चर्च और आश्रम को इस नेटवर्क का मुख्य ठिकाना बनाया गया था। यहीं से डिजिटल माध्यमों के जरिए धर्मांतरण से जुड़े निर्देश और गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
पुलिस के मुताबिक आश्रम में नाबालिग बच्चे-बच्चियों को भी रखा गया था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि करीब 200 घरों में धर्मांतरण की तैयारी चल रही थी, वहीं अलग-अलग इलाकों में बड़ी संख्या में चर्च खोलने की साजिश रची जा रही थी। कार्रवाई के दौरान कई ऐसे डिजिटल सबूत बरामद हुए हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत हजारों डॉलर बताई जा रही है।
इस अवैध चर्च और आश्रम का संचालन डेविड चाको नाम का व्यक्ति कर रहा था, जिसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। डेविड चाको को धर्मांतरण रैकेट का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। पुलिस उससे गहन पूछताछ कर रही है और विदेशी फंडिंग की भी जांच की जा रही है।
दरअसल, 8 जनवरी को ग्राम धर्मापुर से एक लिखित शिकायत पुलिस को मिली थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक व्यक्ति अवैध रूप से आश्रम और चर्च चला रहा है, जहां नाबालिग बच्चों को रखा गया है और कथित तौर पर धर्मांतरण की गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
शिकायत मिलते ही राजनांदगांव एसपी अंकिता शर्मा के निर्देश पर टीम सक्रिय हुई। एसपी अंकिता शर्मा और नगर पुलिस अधीक्षक वैशाली जैन के नेतृत्व में छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान आश्रम से कांकेर जिले के बच्चों को रेस्क्यू कर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) को सौंपा गया। बाद में CWC ने बच्चों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
पुलिस ने छापेमारी के दौरान सोलर आधारित प्रोजेक्टर्स भी जब्त किए हैं, जिनकी कीमत हजारों डॉलर बताई जा रही है। इनका उपयोग उन सुदूर वनांचल और ग्रामीण इलाकों में किया जाता था, जहां बिजली की सुविधा नहीं है। इसके अलावा भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं, जिनमें लैपटॉप, टैबलेट, आई-पैड, प्रीमियम मोबाइल फोन, धर्मांतरण से जुड़े डिजिटल दस्तावेज, प्रेजेंटेशन सामग्री, रजिस्टर और फाइनेंशियल रिकॉर्ड शामिल हैं। इन डिजिटल प्रेजेंटेशन के जरिए लोगों का ब्रेनवॉश किया जाता था।
एसपी अंकिता शर्मा ने बताया कि शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क है। दस्तावेजों से संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क की जड़ें छत्तीसगढ़ के कई अन्य जिलों तक फैली हुई हैं और बड़ी संख्या में लोग पुलिस के रडार पर हैं।
उन्होंने कहा कि फिलहाल पुलिस का मुख्य फोकस इस पूरे नेटवर्क के फंडिंग सोर्स पर है। इतने महंगे उपकरण और बड़े पैमाने पर संचालित आश्रम के लिए पैसा कहां से आ रहा था, इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि फंडिंग विदेशी स्रोतों से तो नहीं हो रही थी या किसी अन्य अवैध गतिविधि से जुड़ी हुई थी।